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बंजारा समुदाय के झाड़ू निर्माता
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सामाजिक पहलू

अरना–झरना संग्रहालय का मानना है कि संस्कृतिक वार्ता के माध्यम से हम सामाजिक विकास के मुद्दों को ज़्यादा गहनता से समझ सकते हैं। इस प्रदर्शनी को झाड़ू बनाने वाले समाज के विकास के सवालों से भी जोड़ा गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से हम कुछ समस्याओं को उजागर करना चाहते हैं और साथ ही उनका समाधान भी ढ़ूँढना चाहते हैं। वह इस प्रकार हैं:-

सड़क के पास बागरिया परिवार की बस्ती
रबड़ ट्यूब की पट्टियाँ काटता बागरीया
  • झाड़ू बनाने की प्रक्रिया से झाड़ू बनाने वाले समुदायों के स्वास्थ पर पड़ने वाले प्रतिकुल प्रभाव को समझना और समाधान ढ़ूँढना।
  • झाड़ू बनाने के सरल और नये उपाय विकसित करने में झाड़ू बनाने वालों की मदद करना।
  • ऐसे मंच का विकास जो सरकारी तंत्र, झाड़ू लगाने वाले, कचरा ढोने वाले और नागरिकों के बीच कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर संवाद स्थापित करे।
  • झाड़ू बनाने वाले परिवारों के बच्चे जो इस काम में लगे हैं उनकी शिक्षा के लिये पहल करना।
  • झाड़ू बनाने वाले समुदायों के सामाजिक और राजनैतिक अधिकारों के प्रति चेतना पैदा करना।

इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक समग्र प्रयास की ज़रूरत है।

क्या एक संग्रहालय सचमुच लोगों के जीवन पर असर डाल सकता है? क्या एक 'सांस्कृतिक' स्थान सामाजिक बदलाव का सूत्रधार हो सकता है?

 
इन सवालों के जवाब एक संस्थान अकेला रहकर नहीं ढूंढ सकता। इसलिए अरना–झरना संग्रहालय अन्य सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़ना चाहता है और आशा करता है कि यह सांस्कृतिक स्थान सामाजिक बदलाव का सूत्रपात बन पायेगा। कृपया info@arnajharna.org  को अपने विचार भेजें।
 
शहरी भागों में झाड़ू


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