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पन्नी झाड़ू का निर्माण
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निर्माण की विधियां

राजस्थान में झाड़ू प्रायः हाथ से बनाये जाते है। व्यावसायिक झाड़ुओं के निर्माण में भी किसी मशीन का प्रयोग नहीं किया जाता है। मानव शरीर के विभिन्न अंग जैसे पैर का अंगूठा और दांत इस प्रक्रिया में प्रमुख कार्य करते हैं।

झाड़ू बनाने के लिये उंगलियों, हाथों और पैरों की निपुणता जरूरी है। झाड़ू बनाने के पहले और आखिरी पड़ाव को तेजी से पूरा करना एक बहुत महत्तवपूर्ण हुनर है। क्योंकि जितनी तेजी से झाड़ू बनेगी उतनी ज़्यादा झाड़ुओं का निर्माण होगा। इसका सीधा असर झाड़ू बनाने वाले की कमाई पर पड़ता है।

पन्नी झाड़ू बनाने के औजार सिना - झाड़ू बनाने का औजार फूल झाड़ू के हत्थे में मिट्टी भरता कारीगर
सींकों को छीलने की सुरी पुराने टायर का ट्यूब और खजूर की बालियां बाँस की सींकें
लकड़ी की कीली लकड़ी की कीली बाँस की सींकें बनाता कारीगर

देखने में आसान लगने वाली यह प्रक्रिया पीढ़ियों से विकसित हुई है। साथ ही लगातार इसमें बदलाव भी आते रहे हैं। खजूर की झाड़ू को बांधने के लिये फेंके हुए टायर के रबड़ ट्यूब का उपयोग इसका एक उदाहरण है।

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खजूर से बना झाडू़

पारंपरिक तरीके से बनाई गई इस झाड़ू में सबसे पहले खजूर की पत्तियों के कांटे झाड़े जाते हैं। फिर इन्हें मुख्य डाली से अलग किया जाता है। इन पत्तियों को गूथकर उनकी महीन डोरी बनाई जाती है जिससे खजूर की पत्तियों को बांधा जाता है। इस डोरी को झाड़ू बनाने वाला अपने पैर के अँगूठे में फँसा लेता है। अँगूठे से डोरी को खींचा जाता है, इससे झाड़ू कसकर बंधती है।

फिर इस डोरी की सहायता से खजूर की पत्तियों को एक साथ गजरे नुमा आकार में गूँथा जाता है जिससे झाड़ू का हत्था तैयार हो जाता है। झाड़ू के चारों तरफ एक गंडा बांधा जाता है, इससे झाड़ू को मजबूती मिलती है। नक्खे की मदद से पत्तियों को चीरा जाता है और अंत में एक तेज छुरी से पत्तियों के ऊपर के छोर को काट दिया जाता है। (चित्र देखें)

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कुछ झाडू़ बनाने वालों ने ऊतरे हुए टायर के रबड़ ट्यूब का उपयोग करना शुरू कर दिया है। ब्लेड से ट्यूब को चीरकर महीन पट्टियाँ निकाली जाती हैं जिससे झाड़ू के हत्थे को बांधा जाता है। ट्यूब थोक में खरीदे जाते हैं। इन पट्टियों को काटने के लिए नाई की दुकान से उतरे हुए ब्लेडों का उपयोग किया जाता है। हालांकि बनाने वाले अपने काम में दक्ष हैं परंतु यह प्रक्रिया जोखिम भरी है।

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बाँस से बना झाड़ू

बाँस की खपच्चियों को एक तेज छुरी से चीरकर बारीक सींकें बनाई जाती हैं। इन सींकों को एकत्रित करके ज़मीन पर लोटाया जाता है जिससे उनका एक बंडल बनाया जा सके। इसी समय सींकों को छांटा जाता है और खराब सींकें फेंक दी जाती हैं। चुनी हुई सींकों को लोहे के तार से बांध दिया जाता है। फिर झाडू़ के हत्थे में लकडी़ से बनी कीली ठोंक दी जाती है। अंत में सींकों के ऊपरी छोर को तेज छुरी से काट दिया जाता है। (चित्र देखें)

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पन्नी से बना झाड़ू

पन्नी घास के सरकण्डे की पर्त को मुंझ कहते हैं, इससे झाड़ू बनाये जाते हैं। मुंझ को इकट्ठा करके एक बंडल बना लिया जाता है। झाडू़ को बांधने के लिए प्लास्टिक की डोरी के एक छोर को सरिये से बांधकर दूसरे छोर को पैर के अँगूठे में फंसा देते हैं। फिर इस डोरी को कस कर मुंझ के चारों तरफ बांध दिया जाता है। गांठ बांधने के बाद, डोरी को दाँत से कसा जाता है। झाड़ू के हत्थे को मोगरी से पीटा जाता है। अगले हिस्से को छुरे से काट दिया जाता है। (चित्र देखें)

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