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संग्रहालय में प्रदर्शित झाड़ू
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झाड़ू के प्रकार
अंदर प्रयुक्त होने वाले झाड़ू

अरना–झरना संग्रहालय व्दारा एकत्रित झाड़ू दो वर्गों में विभाजित किये गये हैं। एक हिस्से में घर के बाहर प्रयोग होने वाले झाड़ू हैं और दूसरे में घर के अंदर काम आने वाले। इस संयोजनात्मक समझ से झाड़ू से जुड़े बहुत से पहलू उजागर हुए हैं।

घरों के अंदर प्रयुक्त होने वाले झाड़ू पन्नी, कांस और सेवन जैसी नाजुक घासों या पत्त्तियों से बनाये जाते हैं। बारिश के मौसम में इस प्रकार की घासें खेतों और रेल की पटरियों के पास उगती हैं। कार्तिक के महीने में (अक्टुबर–नवंबर) इन्हें झाड़ू बनाने के लिये एकत्रित किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में इन झाड़ुओं का प्रयोग घर के भीतरी हिस्सों को साफ करने के लिये होता है। इन झाड़ुओं को खासतौर पर बारीक धूल के कणों को साफ करने के लिये बनाया जाता है। इसलिये इनको बनाने का काम भी बारीकी वाला होता है। कच्ची मिट्टी, सीमेंट, प्लास्टर और पत्थर के सतहों को साफ करने के लिये इनका प्रयोग होता है। इन झाड़ुओं से बाड़े और रास्ते नहीं बुहारे जाते।

यह झाड़ू सहेजकर रखे जाते हैं जिससे कि किसी के पैरों में न आयें। इसलिये आमतौर पर इन्हें चारपाई के नीचे या दरवाजे के पीछे लिटा कर रखा जाता है। यह भी माना जाता है कि झाड़ू के अनादर से लक्ष्मीजी रूठ जाती हैं। मंदिरों और पूजा स्थलों के अंदर सफाई करने के लिये खास तौर पर मोर पंख से बने झाड़ू प्रयुक्त होते हैं। घरेलू झाड़ुओ के साथ कई मान्यताएं और रीति–रिवाज जुड़े हैं।

खेतों के मेढ़ पर उगती पन्नी घास पन्नी घास का ढेर पन्नी का झाड़ू
पन्नी घास पन्नी की सींक को छीलती महिला
बाहर प्रयुक्त होने वाले झा़ड़ू

बाहर प्रयुक्त होने वाले ज़्यादातर झाड़ू आंगन, गौशाला, मैदान, सड़क, फुटपाथ जैसी सतहों को साफ करने के लिये प्रयुक्त होते हैं। बाहर के हिस्से में प्रयुक्त झाड़ू कभी भी अंदर के हिस्से को साफ करने के काम में नहीं लिये जाते। इनके विभिन्न नाम हैं जैसे भुंगरा, बुहारो, बुहारा, बारो, खुआरा, हावारनो और हवेनो। ज्ञातव्य है कि यह सारे नाम पुल्लिंग में हैं।

खुली जगहों की सफाई में उपयोग किये जाने वाले झाड़ू सिणिया और खींप की झाड़ियों से बनाये जाते हैं। इन्हें बनाने के लिये बाँस का भी उपयोग किया जाता है। इन पदार्थों से बने झाड़ू खुरदुरी सतह के लिये उपयुक्त होते हैं। गाँवों में यह सामग्री ऊसर, जंगल, पहाड़ियों और सड़क के किनारे से इकट्ठा की जाती है।

फसल कटाई के वक्त झाड़ू का उपयोग बीज को धान से अलग करने के लिये किया जाता है। एक लचीले और टिकाऊ झाड़ू को मूल्यवान माना जाता है। लंबे समय तक काम में लेने के बाद जब झाड़ू घिस जाता है तो उसके बचे हुए ठूँठ को नालियाँ साफ करने के काम में लिया जाता है। झाड़ू को आखिर तक व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता।

विभिन्न प्रकार की घासों से बने झाड़ू

सीणिया की झाड़ू बनाती महिला सीणिया की झाड़ू लगाती महिला
 
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