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संग्रहालय पर काम करती मीणा महिलायें
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संग्रहालय की संरचना
संग्रहालय स्थल 2004 में

संग्रहालय के सुंदर और सुरम्य स्वरूप को देख कर यह कल्पना करना कठिन है कि यह ज़मीन कभी पत्थरों के टुकड़ों से भरी थी और यहां बलुआ पत्थर की खदान हुआ करती थी। सन् २००२ में यहां पर संग्रहालय का निर्माण कार्य शुरू हुआ और ज़मीन को सुधारा गया। सिंचाई करने से आज इस ज़मीन पर खेजड़ी, कैर, बेर, रोहिड़ा और कुम्बट जैसे पेड़ और भिन्न प्रकार की घासें उगती हैं। पुरानी खदान को एक सरोवर का रूप दे दिया गया है जहां आसपास की चट्टानों के बीच कई प्रकार के पक्षी वास करने लगे हैं।

 

संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुओं और उनके प्राकृतिक परिवेश के बीच एक समन्वय है। इस संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य इन दोनों के अर्न्तसम्बन्ध से उपजे ज्ञान के नये स्वरूपों को संचारित करना है।

संग्रहालय स्थल 2008 में
 
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