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संग्रहालय पहुंचने के रास्ते
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पहुंचने के रास्ते

दस एकड़ ज़मीन पर बना अरना–झरना मरू संग्रहालय जोधपुर से २३ किलोमीटर दूर मोकलावास गाँव के पास स्थित है। यहां पहुंचने के तीन रास्ते हैं। (मानचित्र) इन तीनों रास्तों में कुछ दिलचस्प और उल्लेखनीय स्थान हैं।

जोधपुर से आठ किलोमीटर दूर जैसलमेर जाने वाले राजमार्ग पर कायलाना झील है जिसे प्रताप सागर के नाम से भी जाना जाता है। इस झील को १८७२ में जोधपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री प्रताप सिंह ने बनवाया था। ८४ किलोमीटर के क्षेत्रफल में बनी यह झील आज भी जोधपुर शहर के लिए पीने के पानी का मुख्य स्त्रोत है।

कायलाना झील
बड़ली मंदिर

अरना–झरना पहुंचने के एक और रास्ते में माचिया सफारी पार्क भी उल्लेखनीय है। पास ही बड़ली गाँव में भैंरूजी का मंदिर है जो काला–गोरा भैंरू मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

अरना–झरना फांटा के पास एक और सड़क है जो जोधपुर से जुड़ती है। यह सड़क हरी भरी चोखा घाटी से होती हुई उम्मेद सागर के पास से निकलती है।

संग्रहालय के पास ही एक गौशाला और एक बकराशाला है जिसे धरमपुरा के नाम से भी जाना जाता है। संग्रहालय के आगे अरनेश्वर महादेव शिव मंदिर है, यहां कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है।

गौशाला
 
 
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