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बोर्ड सदस्य
निहार कोठारी (अध्यक्ष)
निहार कोठारी सन् २००१ से राजस्थान पत्रिका समूह के महा निदेशक और कार्यकारी संपादक हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। अमेरिकी सरकार द्वारा आयोजित इन्टरनैशनल विज़िटर्स लीडरशीप प्रोग्राम के लिये उन्हें आमंत्रित किया गया। भारत के प्रधानमंत्री की मीडिया–टीम के साथ वे अमेरिका, रशिया, कंबोडिया, सिंगापुर आदि देशों में जा चुके है। सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग वह जनमंगल पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, प्रथम दिशा, महावीर विकलांग संस्थान (जयपुर फुट), AIESEC जैसी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से वे जुड़े हैं।
 
पियूष सुराणा (उपाध्यक्ष)
पियूष सुराणा चार्टड अकाउंटेन्ट है। सन १९९९ से सन २००५ तक वह अलायंस कॉपीटल ऐसेट मैनेजमेंट के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर रहे। मार्च २००६ से वह शिंसेई बैंक ग्रुप के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर हैं। वह वकालत में स्नातक हैं और सर्टिफाइड फाइनेन्शियल प्लानर भी।
 
श्री विजय दान दैथा (संस्थापक)
श्री विजय दान दैथा ने कोमल कोठारी के साथ रूपायन संस्थान की स्थापना की थी। राजस्थान के सर्वोच्च लेखकों में से गिने जाने वाले दैथा जी, लोक–साहित्य के विद्वान है। कोमल कोठारी के साथ लोक गीतों के शोध की नींव उन्होंने प्रेरणा और लोक संस्कृति नामक पत्रिकाओं के माध्यम से रखी। इतने वर्षों में उन्होंने राजस्थानी लोक गीतों के छः संकलन, राजस्थानी लोक कथाओं पर आधारित बातांरी फुलवारी के तेरह संकलन और राजस्थानी कहावतों के आठ संकलन संपादित किये हैं। देशभर में उनकी पहचान एक लघु कहानी के लेखक के रूप में है। उनकी लिखी कहानियों पर कई फिल्में बन चुकी हैं, उनमें प्रमुख हैं 'दुविधा' (निर्देशक मणि कौल), परिणीति (निर्देशक प्रकाश झा), पहेली (निर्देशक अमोल पालेकर) और चरणदास चोर (निर्देशक श्याम बेनेगल, नाट्य रूपांतर हबीब तनवीर)। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
 
कुलदीप कोठारी (सचिव)
स्वर्गीय कोमल कोठारी के पुत्र कुलदीप कोठारी सन् १९९९ से रूपायन संस्थान से जुड़े हुए हैं। फोर्ड फाउंडेशन और इंडिया फाउंडेशन फॉर दि आर्टस द्वारा निधित परियोजनाओं में उन्होने सहकारी निदेशक के रूप में काम किया है। राजस्थानी लोक संगीतकारों के विश्व के विभिन्न देशों में कार्यक्रम आयोजित कराने में उनका प्रमुख योगदान है। रूपायन से जुड़ने से पहले उन्होंने एक विज्ञापन संस्था में कार्य किया। फिर जयपुर में राजस्थान पत्रिका और पत्रिका टी.वी. के मार्केटिंग के प्रमुख के रूप में कार्य किया। वे राजस्थान संगीत नाटक आकादमी और जोधपुर राज्य संग्रहालय की कमेटी के सदस्य हैं। अरना–झरना मरू संग्रहालय के वे कार्यकारी निदेशक हैं।
 
 
सदस्य (नाम वर्णानुक्रम में दिये गये हैं)
 
अनु मृदुल
अनु मृदुल राजस्थान के जाने–माने वास्तुकार हैं। उन्होंने कोमलदा के साथ अरना–झरना संग्रहालय के कार्यस्थल की रूपरेखा को तैयार किया। १९८५ से वे अपनी निजी प्रैक्टिस में कार्यरत रहे हैं। इस वक्त वह जोधपुर, पाली और नागौर के रेल्वे स्टेशनों की नई रूपरेखा बनाने में कार्यरत है। इससे पहले उन्होंने राजस्थान के कई होटल, जयपुर में मानसरोवर स्थित क्रिकेट स्टेडियम, जोधपुर में तिंवारी स्थित गीता धाम और नौ एकड़ स्थित अशोक उद्यान नामक पार्क बनाये है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ आर्किटेक्टस के वे सहकारी है। १९९६ में उन्हें स्टोन आर्किटेक्चरल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
 
डॉ. उत्तरा कोठारी
डॉ. उत्तरा कोठारी जयपुर स्थित सत् सांई कॉलेज के समाज शास्त्र विभाग में सहायक प्रवक्ता हैं। उनका मुख्य शोधकार्य राजस्थान की घुमंतु रेबारी जाति के आचार, विचार और रीति–रिवाजों पर केंद्रित रहा है।
 
डॉ. ऊषा कोठारी
डॉ. उषा कोठारी जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में होम सांइस विभाग की विभागाध्यक्ष है। उन्होंने मुख्यतः बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में शोधकार्य किया है।
 
मनीश सिसोदिया
पिछले चौदह वर्षों से मनीश सिसोदिया जोधपुर के हाई कोर्ट में वकालात कर रहे हैं। राजस्थान बार काउंसिल के वह सबसे युवा सदस्य हैं और उसके उपाध्यक्ष भी हैं।
 
डॉ. रश्मि पाटनी
कई वर्षों से रूपायन संस्थान से जुड़ी रश्मि पाटनी राजस्थान विश्वविद्यालय में रीडर हैं और इतिहास और भारतीय संस्कृति के डिपार्टमेंट की प्रमुख हैं, साथ ही सेंटर फॉर गांधीयन स्टडीज़ की वह निदेशक भी हैं। इकोल दे हॉत एटयुडस, पॉरिस से उन्होंने डॉक्टरेट की है। उनका शोधकार्य विशेषतः युरोप की भारतीय मसालों से बने रिश्ते पर केंद्रित था।
 
रिषित भंडारी
होटल और रियल एस्टेट के व्यवसाय से जुड़े रिषित भंडारी ने WGSHA, मणिपाल से होटल एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक डिग्री प्राप्त की है। वे उदयपुर स्थित ताज लेक एंड होटल, जयसमंद आइलैण्ड रिज़ॉर्ट और होटल अलका के मालिक है।
 
हनुमान प्रसाद तिवारी
श्री तिवारी राजस्थान पत्रिका समूह के फाइनैन्स निदेशक है। इसी समूह के मानव मित्र संस्थान के वे उपाध्यक्ष भी हैं।
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