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बाहरी दीवारों पर कूँगरी बनाती महिला
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सहयोगकर्ता
अरना-झरना संग्रहालय को साकार करने में इन विशेषज्ञों का प्रमुख योगदान है।
(नाम वर्णानुक्रम में दिये गये हैं)
 
अनीता कोठारी संग्रहालय के विभिन्न अतिथियों के खान-पान और रहने की व्यवस्था का प्रबंधन उनके हाथ में है।
 
अनु मृदुल राजस्थान के जाने-माने वास्तुकार हैं और रूपायन संस्थान बोर्ड के सदस्य हैं। कोमलदा के संग संग्रहालय स्थल के मास्टर प्लान की संरचना उन्होंने की है।
 
अर्जुन सिंह शेखावत कोमलदा के मित्र रहे हैं और पाली क्षेत्र के लोकवार्ताकार हैं। झाडू़ प्रायोजना के प्रारंभिक शोधकार्य में उन्होंने मदद की है।
 
अशोक सोनी जोधपुर स्थित ऑडियो-वीडियो सलाहकार हैं। रूपायन संस्थान और संग्रहालय के कार्य के लिये उन्होंने आधुनिकतम टेक्नॉलॉजी का प्रबंध किया है।
 
कुलदीप सिंह ने हिंदी टाइपिंग के कार्य में विशेष मदद की है।
 
गिरधारी सिंह शेखावत सिंचाई विशेषज्ञ हैं। उन्होंने संग्रहालय स्थल पर जल आपूर्ति के लिये ड्रिप सिंचाई तंत्र के विकास में मदद की है।
 
नवरोज़ कॉन्ट्रैक्टर फोटोग्राफर, सिनेमॉटोग्राफर और फिल्मकार हैं। संग्रहालय की और जोधपुर में झाड़ू लगाने वाले समुदाय की तस्वीरें उन्होंने ली हैं। इस वेबसाईट में शामिल कई तस्वीरें भी उन्हीं के द्वारा ली गई हैं।
 
मूलचंद ठाडा रायपुर के किसान हैं। संग्रहालय स्थल की वानस्पतिक संपदा को विकसित करने में उनका प्रमुख योगदान है।
 
पारसमणि दत्ता तेज़पुर विश्वविद्यालय, आसाम में शोधकार्य विशेषज्ञ हैं। भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों की घासों और झाड़ुओं के बारे में उन्होंने विशेष जानकारी दी है।
 
राकेश सक्सेना और रश्मि सक्सेना वनस्पति विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। राजस्थान की घासों से जुड़ी जानकारी, विशेषतः उनके वैज्ञानिक नामों की जानकारी में उन्होंने मदद की है।
 
राजेंद्र कछवाहा इलेक्ट्रिकल इंजीनीयर हैं। संग्रहालय के विद्युत तंत्र को उन्होंने स्थापित किया है।
 
राजेंद्र जैन कई वर्षों से रूपायन संस्थान से जुड़े हैं। उन्होंने अकाउन्टेन्ट के रूप में संस्थान के आर्थिक पक्ष को सँभाला है।
 
वाय.डी. सिंह जल संरक्षण और मरुधर के वानस्पतिक और जैविक संपदा के नामवर विशेषज्ञ हैं। संग्रहालय की ज़मीन चुनने में वे कोमलदा के प्रमुख सलाहकार रहे हैं।
 
शूभा चौधरी गुड़गाँव स्थित अमेरिकन रीसर्च सेंटर इन एथनोम्युज़कोलॉजी की निदेशक हैं। वह वर्षों से कोमलदा और राजस्थान लोक गायकों के साथ जुड़ी हैं।
 
डॉ सिल्वेस्टर फर्नान्डिस कंप्यूटर सिक्योरिटी और क्रिप्टोग्राफी में डॉक्टरेट हैं और न्यूरँग टेकसॉफ्ट लिमिटेड के निदेशक हैं। संग्रहालय की वेबसाईट उन्होंने बनाई है।
 
डॉ सू्रजमल राव राजस्थानी साहित्य में डॉक्टरेट हैं और रूपायन संस्थान में कार्यरत हैं। इंडिया फाऊंडेशन फॉर दी आर्टस के प्रोजेक्ट के तहत, मांगणियार गायकों के भुला दिये गीतों को संकलित और रिकॉर्ड करने के कार्य से वे जुड़े हैं। झाडू़ प्रायोजना के शोध के कुछ अंशों का अनुवाद उन्होंने किया है।
 
 
संग्रहालय पर काम करते कारीगर झोपे का छप्पर बनाते कारीगर
 
 
इन पारंपरिक कारीगरों का संग्रहालय के निर्माण कार्य को पूरा करने में प्रमुख योगदान है।
(नाम वर्णानुक्रम में दिये गये हैं)
 
अखिला साठिया जाति की कलाकार हैं। संग्रहालय के अंदर वेल उन्होंने बनाया है। इस कार्य में उनकी मदद अहमद मांगणियार ने की है।
 
अशोक माकड एक पारंपरिक सुथार हैं। अनु मृदुल के निर्देशन में संग्रहालय का निर्माण कार्य उनकी देखरेख में पूरा किया गया है।
 
चैनगिरी मोकलावास गाँव के निवासी हैं। पत्थर की खानों में काम करने का उनका लंबा अनुभव है। संग्रहालय स्थल से बड़े पत्थरों के पटियों को निकाल कर उनसे रास्ते और झील की नींव बनाने का काम उन्होंने किया है।
 
ढगलाराम मेघवाल बोरुँदा से कोमलदा के साथ हैं। उन्होंने संग्रहालय स्थल पर कई पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियाँ आदि लगाए हैं।
 
बीजाराम मिट्टी की ईंटें बनाते हैं। इनकी बनाई ईंटों से संग्रहालय को बनाया गया है।
 
भगवानदास गोठ्लिवाल एक पारंपरिक सुथार हैं। संग्रहालय के दरवाज़े, खिड़कियाँ और पैनल उन्होंने बनाये हैं।
 
भैराराम जोधपुर के तेना गाँव के एक पारंपरिक सुथार हैं जिन्होंने संग्रहालय की छत का ढांचा बनाया है।
 
मोहन सिंह राठौड़ मोकलावास गाँव के निवासी हैं। संग्रहालय निर्माण में लगी सामग्री की आपूर्ती उन्होंने की है।
 
लालचंद राव यांत्रिक कार्य करते हैं। उनकी जुगाड़ की समझ ने संग्रहालय की कार्यकुशलता को सुदृढ़ किया है।
 
बेबी देवी, घवरा बाई, धांकी, धापुड़ी़, गोमती देवी, कबू देवी, और जामूड़ी़ ने संग्रहालय निर्माण का कार्य किया है।
 
काली, पानबाई, हेमलता और कीमत, मीणा जाति की महिलायें हैं जिन्होंने संग्रहालय की दीवारों पर मांडना चित्र बनाये हैं।
 
निरमा, इंद्रा, तुलसी, अग्री और रेखा बाड़मेर की कलाकार हैं। संग्रहालय की बाहरी दीवारों पर कूँगरी उन्होंने बनाई है।
 
जसवंत प्रजापत, नरपत सिंह, पुखराज, सुखदेव, अहमद (ड्राईवर) संग्रहालय के कर्मचारी हैं। वे संग्रहालय के रख-रखाव, खान-पान और परिवहन को संभालते हैं।
 
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