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फील्ड वर्क करते प्रोजेक्ट टीम के सदस्य
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प्रोजेक्ट टीम
संग्रहालय की झाड़ू प्रायोजना को साकार करने में इन लोगों का प्रमुख योगदान है।
 
 
Rustom Bharucha रुस्तम भरूचा - प्रोजेक्ट डायरेक्टर

रुस्तम भरूचा लेखक, नाट्य निर्देशक और आलोचक है। उन्होंने वैश्विकरण, धर्म-निरपेक्षता से जुड़े विषयों पर किताबें लिखी हैं। वे हैं - थियेटर एंड द वर्ल्ड, "दि क्वेस्चन ऑफ फेथ, इन दि नेम ऑफ दि सेक्यूलर, दि पॉलिटिक्स ऑफ कल्चरल प्रैक्टिस, अनदर एशिया – रवीन्द्रनाथ टैगोर एंड ओकाकुरा तेनशिन, कोमल दा के साथ उन्होंने राजस्थान – एन ओरल हिस्टरी नामक किताब लिखी है। अरना-झरना संग्रहालय के साथ उनका जुड़ाव इसी किताब का अगला पड़ाव है। संस्कृति और विकास के विभिन्न पहलुओं में उनकी रुचि है । अरना-झरना के माध्यम से वे ज़मीनी संग्रहालय ज्ञान के सैध्दांतिक और व्यावहारिक पक्ष को परखना चाहते हैं।
 
 
Kuldeep Kothari कुलदीप कोठारी – कार्यकारी निदेशक

स्वर्गीय कोमल कोठारी के पुत्र कुलदीप कोठारी सन् १९९९ से रूपायन संस्थान से जुड़े हुए हैं। फोर्ड फाउंडेशन और इंडिया फाउंडेशन फॉर दि आर्टस द्वारा निधित परियोजनाओं में उन्होने सहकारी निदेशक के रूप में काम किया है। राजस्थानी लोक संगीतकारों के विश्व के विभिन्न देशों में कार्यक्रम आयोजित कराने में उनका प्रमुख योगदान है। रूपायन से जुड़ने से पहले उन्होंने एक विज्ञापन संस्था में कार्य किया। फिर जयपुर में राजस्थान पत्रिका और पत्रिका टी.वी. के मार्केटिंग के प्रमुख के रूप में कार्य किया। वह राजस्थान संगीत नाटक आकादमी, जोधपुर के सदस्य हैं। वे जोधपुर के राज्य संग्रहालय की कमेटी के सदस्य भी हैं।
 
 
Madan Meena मदन मीणा - क्यूरेटर

मदन मीणा चित्रकार और शोधकर्ता हैं। राजस्थान के विभिन्न आंचलिक समुदायों के साथ उन्होंने काम किया है। मीणा जाति की महिलाओं द्वारा बनाये जाने वाले मांडना चित्रकारी पर उन्होंने गहन शोध किया है। इस विषय पर डॉक्टरेट की थीसीस लिखने के साथ ही उन्होंने इस विषय पर दो किताबें भी प्रकाशित की हैं - जॉय ऑफ क्रियेटिविटी और नर्चरिंग वॉल्स । एक चित्रकार के रूप में उन्होंने देश भर में अपना काम प्रदर्शित किया है। झाड़ू विषय की सरलता और कलात्मकता ने उन्हें अरना-झरना संग्रहालय से जुड़ने के लिये प्रेरित किया।
 
 
Anil Sharma अनिल शर्मा - संग्रहालय प्रबंधक

अनिल शर्मा जोधपुर विश्वविद्यालय के स्नातक हैं। विभिन्न परियोजनाओं के व्यावहारिक पक्ष को संभालने का उनके पास लंबा अनुभव है। बिजली, पानी, दमकल और संग्रहालय के प्रचालन तंत्र को संभालना उनका मुख्य कार्य है।
 
 
Tripti Vyas तृप्ति व्यास – कम्यूनीकेशन्स

तृप्ति व्यास उच्च शिक्षा, प्रकाशन और फण्डिंग के क्षेत्र से जुडी़ रही हैं। दस वर्ष तक पूर्व स्नातक स्तर पर अंग्रेजी साहित्य सिखाने के बाद वह मुंबई स्थित आई.एम.एस. पब्लिकेशन्स में मुख्य संपादक रहीं। इंडिया फाउण्डेशन फॉर दी आर्टस से जुड़ने के बाद उनकी रुचि राजस्थान में विकसित हुई। वह संग्रहालय के कम्यूनीकेशन्स और आउटरीछ से जुड़े कार्य संभालती हैं।
 
 
Sharwan Kumar Meghwal श्रवण कुमार मेघवाल – शोधकर्ता

श्रवण कुमार मेघवाल राजस्थानी साहित्य में अधिस्नातक हैं। पिछले आठ वर्षों से वे रूपायन संस्थान से जुड़े हैं, जहां कोमलदा के मार्गदर्शन में उन्होंने क्षेत्र कार्य के गुर सीखे। स्थानीय मान्यताओं और रीति रिवाजों को वे अच्छी तरह समझते हैं। संग्रहालय के घासों, झाड़ू और झाड़ू निर्माण से जुडे़ शोधकार्य में उनका प्रमुख योगदान है।
 
 
Praveen Singh Rathore प्रवीण सिंह राठौड़ – वीडियोग्राफर

प्रवीण सिंह राठौड़ संग्रहालय़ के शोधकार्य से जुड़े ऑडियो और वीडियो कार्यों को संभालते हैं। गुड़गांव स्थित अमेरीकन रिसोर्स सेंटर फॉर एथनोम्युज़कोलॉजी से उन्होंने ऑडियो-वीडियो आर्काईविंग में ट्रेनिंग प्राप्त की है।
 
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