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राय और मल
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इतिहास और भूदृश्य
राय मल नाडा अरनेश्वर महादेव शिव मंदिर

यह संग्रहालय जहां बना है उस स्थान को आसपास के लोग अरना–झरना के नाम से जानते हैं। यह नाम पास ही स्थित अरनेश्वर महादेव शिव मंदिर से जुड़ा है। माना जाता है कि इस मंदिर से जुड़े झरने व यहां स्थित कुंड में नहाने से लोग रोग मुक्त हो जाते हैं।

संग्रहालय की सीमा पर बनी दीवार के पास एक तलैया है जिसे कभी रायमल तालाब के नाम से जाना जाता था। आज गांव के लोग इसे रायमल नाडा कहते हैं। किसी समय में इसे बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लिये बनाया गया था।

रायमल नाडा के साथ एक पुरातन कहानी जुड़ी है। सोलहवीं सदी में राजपुरोहित कुल के भाई–बहन थे। बहन का नाम राय था और भाई का नाम मल। भाई चाहता था कि तालाब को उसका नाम दिया जाये क्योँकि वह उसकी ज़मीन पर बना था। बहन का दावा था कि तालाब उसके नाम पर होना चाहिये क्योंकि बनाने के लिये धन उसने दिया था। भाई–बहन अपनी जिद्द पर बने रहे और दोनों के बीच घमासान लड़ाई हुई। दोनों इस लड़ाई में मारे गये। अपनी मृत्यु से पहले बहन ने श्राप दिया कि बारिश में यह तालाब भर तो जायेगा परंतु जैसे ही कोई गाय उसमें पानी पियेगी तो तालाब सूखना शुरू हो जायेगा। यहां के लोगों का मानना है कि यह श्राप सदियों से आज तक चला आ रहा है।

भाई–बहन की यह कथा रायमल नाडे से जुड़ी संग्रहालय परिसर में एक शिला पर अंकित है।(चित्र देखें) इसमें एक विहंगम त्रिशूल है जिसके एक तरफ हाथी बना है और दूसरी तरफ घोड़ा। साथ ही एक शिलालेख है जिसमें राय और मल का ज़िक्र है।

इसके अलावा एक और शिलालेख है जिस पर आड़ी और खड़ी रेखाएं बनी हुई हैं। यह किसी मंदिर का वास्तु चित्र जान पड़ता है जिसमें रायमल नाडा भी दिखाया गया है। भारतीय संवत् के अनुसार यह दोनों शिलालेख १५०६ और १५६० के हैं।

 
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